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मौत के साए से बाहर आई नवजात, जिला चिकित्सालय की बड़ी सफलता



शहडोल। सादिक खान 

 शहडोल । निर्धारित समय से दो माह पहले माँ के गर्भ से जन्म लेने वाली एक नवजात को जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने जीवन प्रदान किया ,जबकि जब उसे अस्पताल लाया गया था ,वह मौत के मुहाने पर थी । जानकारी के अन अनुसार बीते 1 दिसंबर को बुढार ब्लॉक के ग्राम सराईकापा के बुढार ब्लॉक जिला शहडोल के निवासी कंचन चर्मकार पति चंद्रभूषण चर्मकार ने मात्र 6 महीने 15 दिन की गर्भावस्था में एक बहुत ही कमजोर शिशु बच्ची को जन्म दिया । जिसका वजन महज 800 ग्राम था। जिला चिकित्सालय शहडोल में जन्मी बच्ची मात्र साढ़े छः माह में डिलीवरी हुई | समय से पहले जन्मी अति कमजोर शिशु की हालत बहुत ही नाजुक थी उसे तुरंत ही जिला चिकित्सालय शहडोल के ही एस एन सी यू में भर्ती कराया गया। 

मौत के करीब थी नवजात 

बच्ची कमजोर होने के साथ-साथ रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम एवं HMD (ऐसी इस्थिति जिसमे फेफड़े कोलेप्स होते है, फूल नहीं पाते और मरीज सांस नहीं ले पाता )से ग्रसित थी। रात को 9बजे जन्मी बच्ची को तुरंत ही नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया साथ ही सर्फेक्टेंट थेरेपी देते हुए उसका उपचार चालू किया गया। बच्ची की हालत बहुत ही नाजुक थी। 

एसएनसीयू स्टाफ ने शुरू किया उपचार 

नवजात की इतनी गंभीर स्थिति के पश्चात भी जिला चिकित्सालय के सभी शिशु रोग विशेषज्ञ एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के साथ सभी स्टाफ ने इसे चैलेंज के रूप में लेते हुए बहुत ही लगन से नवजात का उपचार शुरू किया । उसे पूरे 14 दिन नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर पर रखा गया । बीच-बीच में वह सांस भी रोक ले रही थी लेकिन हर बार चिकित्सकों के अथक प्रयास एवं स्टाफ की तत्परता से इस बच्ची की समस्या का निदान करते हुए आखिर उसे वेंटिलेटर से बाहर लाने में सफलता मिली ।

शुरू कराई गयी नली से फीडिंग 

 करीब 14 दिनों के बाद ही शिशु को मां का दूध नली से पिलाना चालू किया गया दो-तीन एम् एल प्रतिदिन 2-2 घंटो मे दूध पिलाते हुए शुरुआत हुई । बेहतर नर्सिंग केयर एवं कंगारू मदर केयर की मदद से शिशु के वजन में बढ़ोतरी होती गई बच्ची के माता-पिता ने चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ का शिशु के इलाज में पूरा सहयोग किया एवं सभी निर्देशों का पालन किया । ढेढ़ माह यानी 45 दिन के मेहनत के बाद सभी की मेहनत रंग लाई और शिशु का वजन 1 किलो 550 ग्राम के ऊपर पहुंच गया।   

महत्वपूर्ण उपलब्धि 

जिला चिकित्सालय के एससएनसीयू के इंचार्ज शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील हथगेल ने बताया कि हमारे लिए यह उपलब्धि बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बच्ची के इलाज में एक भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं हुआ। एक भी एंटीबायोटिक का सिंगल डोज भी नहीं दिया गया। यह बहुत बड़ी बात है। प्रायः ऐसा संभव नहीं होता चाहे कितना भी बड़ा प्राइवेट हॉस्पिटल हो। हमारे एससएनसीयू मे नर्सिंग केयर का इतना उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया कि इस बच्ची को सेकेंडरी इंफेक्शन होने से पूर्णतया बचा लिया गया और अंततः बच्चे बिना किसी एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के ही स्वस्थ हुई । 

परिजनों के दिल से निकली दुआ 

 माता-पिता के आग्रह पर आज बच्ची को एससएनसीयू से सुरक्षित डिस्चार्ज कर दिया। गया माता-पिता एससएनसीयू के सभी चिकित्सक एवं स्टाफ की सराहना करते नहीं थक रहे बच्चों के माता-पिता का कहना है कि उनको पता था कि इस तरह के बच्चों को बचना बहुत ही अत्यधिक मुश्किल होता है लेकिन फिर भी वह उन्हें sncu जिला चिकित्सालय के डॉक्टर्स और स्टाफ उनका हिम्मत बढ़ाते रहे और अंत में उन्हें सफलता हासिल हुई| उन्होंने जिला चिकित्सालय शहडोल के एससएनसीयू के चिकित्सक डॉ. सुनील हथगेल, डॉ. सुप्रिया, डॉ.बृजेश पटेल, डॉ.कृष्णनेंद्र के साथ सभी नर्सिंग ऑफिसर एवं सपोर्ट स्टाफ का धन्यवाद दिया । जिला चिकित्सालय शहडोल के एससएनसीयू में मात्र 6माह 15 मे जन्मी बच्ची को मिला जीवनदान

सी एम एच ओ डॉ. राजेश मिश्रा के मार्गदर्शन एवं सिविल सर्जन डॉ शिल्पी सराफ के नेतृत्व मे जिला अस्पताल शहडोल के एससएनसीयू ने एक और उपलब्धि हासिल की|


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