शहडोल। सादिक खान 

शहडोल। जिला मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को रोजाना कॉलेज पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का आरोप है कि बाणगंगा बाइपास तिराहे से गुजरने वाली निजी बसों के कंडक्टर उन्हें कॉलेज तक ले जाने से मना कर देते हैं, वहीं कई बार बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है। इससे छात्रों को मजबूरी में पैदल या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। छात्रों ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन और कॉलेज प्रबंधन से भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।

एक छात्र ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि वह अमलाई से रोज पक्षीराज कंपनी की बस से शहडोल आता है। बस रीवा तक जाती है और इंजीनियरिंग कॉलेज के सामने से गुजरती है, लेकिन कंडक्टर उसे बाणगंगा बाइपास पर ही उतार देता है। छात्र के अनुसार जब उसने अतिरिक्त किराया देने की बात कही तो कंडक्टर ने अभद्रता करते हुए कहा कि “जहां शिकायत करनी है कर दो, कॉलेज तक नहीं ले जाएंगे।”

रोजाना 20 से अधिक छात्र परेशान

छात्रों का कहना है कि सुबह के समय करीब 20 से अधिक छात्र बस स्टैंड और बाणगंगा बाइपास तिराहे पर बसों का इंतजार करते हैं। जब पक्षीराज और दीपक कंपनी की बसें वहां पहुंचती हैं तो छात्रों को किराया देने के बावजूद बस में बैठने नहीं दिया जाता। ऐसे में मजबूरी में छात्रों को ऑटो बुक कर कॉलेज जाना पड़ता है, जिससे उनका अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।

बीच रास्ते उतारने का भी आरोप

एक छात्र ने बताया कि कई बार छात्र बस में बैठ भी जाते हैं, लेकिन रास्ते में कंडक्टर उन्हें पहचानकर कोनी के पास बीच सड़क पर उतार देता है। इसके बाद छात्रों को ऑटो से कॉलेज जाना पड़ता है। छात्रों के मुताबिक परेशान होने वाले अधिकांश छात्र सेकंड ईयर के हैं।

कॉलेज प्रबंधन ने परिवहन विभाग को लिखा पत्र

इंजीनियरिंग कॉलेज के माइनिंग विभागाध्यक्ष अभिमताभ मिश्रा ने बताया कि छात्रों की यह समस्या पहले भी उनके संज्ञान में आई थी। इस संबंध में परिवहन विभाग को पूर्व में पत्राचार भी किया गया था, लेकिन स्थिति में अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है।

बस संगठन के अध्यक्ष ने कहा

“पूर्व में बस संचालकों की बैठक में यह तय किया गया था कि इंजीनियरिंग कॉलेज जाने वाले छात्रों से केवल ₹10 किराया लिया जाएगा और वापसी में भी ₹10 ही लिया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी ने छात्रों को बीच रास्ते उतारा है या कॉलेज तक ले जाने से मना किया है तो यह गलत है। मामले की जानकारी लेकर संबंधित कर्मचारियों से बात की जाएगी।

बस संचालक रूप मंगलानी ने कहा

मैंने अपने स्टाफ को छात्रों को कॉलेज तक ले जाने से मना नहीं किया है। यदि किसी छात्र को बीच रास्ते उतारा गया है या बस में बैठाने से इनकार किया गया है तो यह गलत है। मामले की जांच कर कर्मचारियों से बात करेंगे।

वहीं इस मामले में जब शहडोल आरटीओ अनपा खान से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे बात नहीं हो सकी।