शहडोल। सादिक खान
शहडोल। जिले के ब्यौहारी क्षेत्र से आए एक दस वर्षीय बच्चे ने गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी को मात देकर नई जिंदगी पाई है। उसके परिवार के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जब बच्चे को अचानक हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होने लगी। महज दो दिनों में हालत इतनी बिगड़ गई कि वह खड़ा होने और चलने में असमर्थ हो गया। परिजनों ने तत्काल उसे बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, शहडोल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया।
अस्पताल में भर्ती के समय बच्चे की स्थिति चिंताजनक थी। उसकी मांसपेशियों की ताकत तेजी से घट रही थी। विशेषज्ञों की जांच में पुष्टि हुई कि वह गिलियन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित है—एक ऐसी बीमारी जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है, जिससे तेजी से बढ़ती कमजोरी और गंभीर मामलों में सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. रिनु शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निशांत और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरिनारायण तिवारी के मार्गदर्शन में उपचार शुरू किया गया। साथ ही न्यूरोफिज़ियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कंसल्टेंट डॉ. मितेश सिन्हा द्वारा किए गए नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (NCV) परीक्षण से सटीक निदान में अहम मदद मिली।
इलाज के शुरुआती दिनों में बच्चे की हालत और बिगड़ गई। कमजोरी इतनी बढ़ गई कि वेंटिलेटर की आवश्यकता की आशंका बनने लगी। यह समय परिवार और चिकित्सकीय टीम—दोनों के लिए बेहद कठिन था। हालांकि समय पर दी गई दवाओं, सतत निगरानी और विशेषज्ञ उपचार का असर दिखने लगा। कुछ ही दिनों में स्थिति स्थिर हुई और धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ।
करीब 15 दिन तक आईसीयू में रखने के बाद बच्चे को सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया। वहां एक सप्ताह तक दवाओं के साथ नियमित फिजियोथेरेपी कराई गई। धीरे-धीरे उसकी मांसपेशियों में ताकत लौटने लगी और वह फिर से चलने-फिरने लगा। अंततः बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका। पीआईसीयू सिस्टर इंचार्ज देविका और नर्सिंग स्टाफ—सोनम, निखत, पूजा, दुर्गा, श्वेता, प्रियंका, दीपशिखा, तरुणलता, अपर्णा और संध्या—की भूमिका भी सराहनीय रही।
विशेषज्ञों ने अपील की है कि यदि बच्चों में अचानक कमजोरी, झुनझुनी, चलने में दिक्कत या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर उपचार से गिलियन-बैरे सिंड्रोम पूरी तरह ठीक हो सकता है।

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