सीएमओ के यू-टर्न से बढ़ा विवाद, जनप्रतिनिधियों में नाराजगी
शहडोल। संभागीय मुख्यालय से लगे ग्राम धुरवार-नवलपुर में सोन नदी पर बनने वाला 28 करोड़ रुपए का बैराज निर्माण अफसरशाही, टेंडर विवाद और कथित कमीशनखोरी के आरोपों के बीच फंस गया है। खनिज प्रतिष्ठान मद से स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का टेंडर और प्रशासनिक मंजूरी पूरी होने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। देरी के कारण शहर की वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था भी खतरे में पड़ती दिख रही है।
नई सीएमओ के आते ही बदला रुख
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका में नई सीएमओ के पदभार संभालने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। आरोप है कि सीएमओ के पति की ओर से चयनित ठेकेदार से कमीशन को लेकर बातचीत की गई। जब कथित तौर पर बात नहीं बनी तो सीएमओ ने परिषद और कलेक्टर की सहमति के बिना सीधे नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को पत्र भेजकर टेंडर निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी।
कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलीं और अब वही सीएमओ पुराने टेंडर को मंजूरी दिलाने के लिए परिषद अध्यक्ष पर दबाव बनाती नजर आ रही हैं। इस दोहरे रवैये को लेकर नगर पालिका परिषद के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी है।
शहर की प्यास से जुड़ा है प्रोजेक्ट
यह बैराज शहर की भविष्य की पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरफा डैम में जल संकट की स्थिति बनने पर सोन नदी का यही बैराज शहर को वैकल्पिक जल आपूर्ति देगा। परिषद ने लंबे प्रयासों के बाद इस योजना को मंजूरी दिलाई थी, लेकिन प्रशासनिक विवादों के कारण अब तक जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही लगातार देरी से परियोजना की लागत बढ़ने की भी आशंका है।
परिषद अध्यक्ष ने प्रशासन पर साधा निशाना
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष घनश्यामदास जासयवाल ने कहा कि परिषद ने अपना काम करते हुए प्रस्ताव पारित कर दिया था और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण निर्माण एजेंसी काम शुरू नहीं कर पा रही है।
वहीं नगर पालिका सीएमओ आशा भंडारी ने कहा कि टेंडर उनके आने से पहले हो चुका था। उन्होंने केवल पत्राचार किया है और फिलहाल भोपाल स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि सभी निर्माण कार्य नियमों के तहत ही कराए जाएंगे।
फिलहाल मामला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर प्रभारी मंत्री के फैसले पर टिकी है कि शहर को बैराज मिलेगा या विवाद और लंबा खिंचेगा।

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