शहडोल। सादिक खान
शहडोल। बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमजीएमसी) के शिशु रोग विभाग द्वारा राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत ओआरएस सप्ताह मनाया गया। अभियान का उद्देश्य दस्त (डायरिया) से होने वाली बाल मृत्यु और कुपोषण की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. गिरीश रामटेके की उपस्थिति में हुआ। उन्होंने कहा कि दस्त के दौरान शरीर में पानी और लवण की कमी को पूरा करने में ओआरएस सबसे प्रभावी और सरल उपाय है। उन्होंने अभिभावकों से घर में हमेशा ओआरएस उपलब्ध रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत इसका उपयोग करने की अपील की।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि ओआरएस केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान एमबीबीएस विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को दस्त से बचाव और ओआरएस के सही उपयोग की जानकारी दी।
शिशु रोग विशेषज्ञों ने बताया कि दस्त होने पर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में ओआरएस घोल, जिंक की गोली, स्तनपान और स्वच्छ पेयजल देना जरूरी है। साथ ही हाथों की नियमित सफाई और सुरक्षित भोजन अपनाकर दस्त की रोकथाम की जा सकती है।
कार्यक्रम में ओआरएस घोल बनाने और पिलाने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया तथा लोगों को नि:शुल्क ओआरएस और जिंक का वितरण किया गया। चिकित्सकों ने अपील की कि यदि किसी बच्चे को बार-बार दस्त, लगातार उल्टी या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बीएमजीएमसी शहडोल में संपर्क करें। इस दौरान अस्पताल उप अधीक्षक डॉक्टर विक्रांत कबीरपंथी सहित तमाम डॉक्टर एवं स्टाफ मौजूद रहे।


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