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कागजों में नरगी, जमीन पर टावर उधिया में… ग्रामीण पहुंचे कलेक्टर दरबार, बोले- नहीं रुका काम तो होगा आंदोलन

 


शहडोल।सादिक खान 

शहडोल। जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत उधिया में लगाए जा रहे मोबाइल टावर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टावर निर्माण को लेकर नाराज ग्रामीण मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर और जिला पंचायत CEO के पास पहुंचे और शिकायत सौंपते हुए निर्माण को अवैध बताया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई कर निर्माण नहीं रोका गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

शिकायत में ग्रामीणों ने खुलासा किया कि जिस टावर का निर्माण उधिया में धड़ल्ले से जारी है, उसकी तकनीकी स्वीकृति वास्तव में ग्राम पंचायत नरगी के पड़रिया क्षेत्र के लिए जारी की गई थी। सवाल यह उठता है कि जब सरकारी दस्तावेजों में स्थान 'ए' तय है, तो निर्माण कंपनी अपनी मर्जी से स्थान 'बी' पर काम कैसे शुरू कर सकती है? ग्रामीणों का आरोप है कि यह महज तकनीकी गलती नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग के अधिकारियों की गहरी मिलीभगत का परिणाम है।

बिना NOC निर्माण नियमों की धज्जियां उड़ीं

ग्रामीणों ने जनसुनवाई में अधिकारियों को बताया कि ग्राम सभा को अंधेरे में रखा, टावर लगाने के लिए न तो उधिया ग्राम सभा से कोई प्रस्ताव पारित कराया गया और न ही अनुमति ली गई।खुद पंचायत सचिव मनोज सिंह स्वीकार कर चुके हैं कि पंचायत की ओर से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया गया है। दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानीय निकाय की अनुमति अनिवार्य है, जिसका यहां सरेआम उल्लंघन हो रहा है।

बड़ा सवाल

मौन क्यों है प्रशासन? जब पंचायत सचिव खुद मान रहे हैं कि NOC नहीं है, तो काम रोकने के आदेश अब तक क्यों नहीं दिए गए?लोकेशन कैसे बदली? क्या निर्माण एजेंसी इतनी ताकतवर है कि वह सरकारी आदेश की लोकेशन खुद ही बदल ले?

कौन बचा रहा है कंपनी को?

प्रभारी CEO द्वारा दूरसंचार विभाग को सूचना देने की बात कही गई थी, लेकिन धरातल पर काम का न रुकना किसकी ओर इशारा कर रहा है? ग्रामीण सुनील साहू ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण पर रोक लगाकर उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं की गई, तो वे चक्काजाम और तहसील घेराव जैसे कदम उठाएंगे।

"यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है। जिस क्षेत्र के लिए सुविधा स्वीकृत हुई है, उसे वहीं लगाया जाना चाहिए। उधिया की जनता इस अन्याय और नियमों के विरुद्ध हो रहे काम को सहन नहीं करेगी। कैलाश त्रिपाठी, समाजसेवी एवं पूर्व उप सरपंच, नरगी

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