शहडोल। सादिक खान
शहडोल। जिले की सड़कों पर रफ्तार अब सीधे मौत बनकर दौड़ रही है। हर दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में नजर आ रहा है। ताजा हादसा ब्यौहारी थाना क्षेत्र के जोरा पुलिया के पास हुआ, जहां अज्ञात वाहन ने बाइक सवार दो युवकों को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में एक भाजपा युवा नेता भी शामिल बताया जा रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक टिहकी निवासी राहुल द्विवेदी (25) और अतुल तिवारी शनिवार रात झिरिया गांव में शादी समारोह में शामिल होकर बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान शहडोल-रीवा हाईवे पर जोरा पुलिया के पास किसी तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को रौंद दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और सड़क खून से लाल हो गई।
सुबह सड़क किनारे मिले शव, मचा हड़कंप
बताया जा रहा है कि हादसा देर रात हुआ, लेकिन इसकी जानकारी रविवार सुबह तब लगी जब ग्रामीणों ने सड़क किनारे क्षतिग्रस्त बाइक और दोनों युवकों के शव पड़े देखे। सूचना मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है।
घटना की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवारों में कोहराम मच गया। अस्पताल में परिजनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। राहुल द्विवेदी के भाजपा युवा नेता होने की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में भी शोक की लहर दौड़ गई।
सात दिनों में 9 मौतें, फिर भी नहीं जागा सिस्टम
शहडोल जिले में बीते सात दिनों के भीतर सड़क हादसों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कहीं तेज रफ्तार बोरवेल वाहन ने मां-बेटे को कुचल दिया, तो कहीं अज्ञात वाहन ने पिता-पुत्र की जिंदगी छीन ली। बुढार, ब्यौहारी, देवलौंद और जैतपुर जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसों ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है।
इसके बावजूद न तो हाईवे पर निगरानी बढ़ी और न ही यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। जिले में बिना हेलमेट दौड़ती बाइकें आम बात बन चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि कई बार खुद पुलिसकर्मी भी बिना हेलमेट वाहन चलाते नजर आते हैं।
सवालों के घेरे में यातायात विभाग
लगातार हो रही मौतों के बाद अब यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त अभियान चलाया जाता, हाईवे पर चेकिंग बढ़ती और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई होती, तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल शहडोल की सड़कें लोगों के लिए सफर नहीं, बल्कि डर का दूसरा नाम बनती जा रही हैं।

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