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अगर कोई नाव डूबे तो सरसी आईलैंड में रेस्क्यू दल तक नहीं, पुलिस ने कहा हमारे पास तैराक नहीं..



 शहडोल। सादिक खान 

शहडोल। जिले के पपौंध थाना क्षेत्र के सरसी गांव के पास बाणसागर बैक वाटर में बना सरसी आईलैंड सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। गुरुवार शाम तेज आंधी-तूफान के दौरान जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूबने से 9 लोगों की मौत की घटना के बाद जब अमर उजाला टीम ने सरसी आईलैंड को लेकर सुरक्षा की जानकारी ली,तो यहां पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई।

आइलैंड में किसी भी प्रकार का रेस्क्यू दल मौजूद नहीं है। यदि कोई नाव हादसे का शिकार होती है, तो तत्काल बचाव के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। सबसे नजदीकी थाना भी करीब 10 किलोमीटर दूर है, जहां न तो पुलिस के पास नाव उपलब्ध है और न ही प्रशिक्षित तैराक।

तीन रास्तों से पहुंचते हैं पर्यटक

सरसी आईलैंड तक पहुंचने के लिए तीन प्रमुख बोटिंग प्वाइंट हैं। पहला इटमा, जहां से पानी के रास्ते लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। दूसरा मार्ग मार्कण्डेय से है, जो करीब 4 किलोमीटर दूर है। वहीं सबसे नजदीकी रास्ता पपौंध थाना क्षेत्र के काढ़े प्वाइंट से है, जहां से पर्यटक महज 2 से 2.5 किलोमीटर की दूरी नाव से तय कर आइलैंड पहुंचते हैं। हालांकि आपात स्थिति में पुलिस के पहुंचने में समय लगना तय है।

पुलिस ने भी मानी लाचारी

पपौंध पुलिस ने स्पष्ट कहा कि किसी आपदा की स्थिति में पुलिस को भी आइलैंड तक पहुंचने के लिए वहीं मौजूद नावों का सहारा लेना पड़ता है। विभाग के पास न तो खुद की नाव है और न ही कोई रेस्क्यू टीम या तैराक उपलब्ध हैं, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव हो सके।

प्रबंधन का दावा—सुरक्षा का रखते हैं ध्यान

सरसी आईलैंड के मैनेजर अंकित उपाध्याय ने बताया कि उनके पास कुल मिलाकर 5 नावें है,जिसमें एक वाटर स्कूटर और तीन नाव ऐसी जिसमें चार से पांच लोग आ सकते है, एक जलपरी’जिसमें एक साथ 18 पर्यटक बैठ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को नाव में नहीं बैठाया जाता। साथ ही, एक नाव हमेशा स्टैंडबाय में रखी जाती है, ताकि तकनीकी खराबी की स्थिति में मदद पहुंचाई जा सके। उन्होंने आगे बताया कि गुरुवार शाम जब मौसम खराब हुआ तो हमने वोटिंग बंद कर दी थी गुरुवार को चार नंबर रूम खुला हुआ था जिसमें एक गेस्ट रुके हुए थे कल शाम मौसम खराब होने के बाद वोटिंग नहीं की गई और शुक्रवार सुबह पुनः वोटिंग शुरू की है।हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास कोई अलग रेस्क्यू दल नहीं है। नाव चालक ही तैराक हैं, जिन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। जिनकी संख्या 5 है।

एसडीईआरएफ प्रभारी ने क्या कहा

शहडोल से सरसी आईलैंड की दूरी लगभग 125 किलोमीटर दूर है।हमने जब एसडीईआरएफ के प्रभारी कोमल सिंह से बात की तो उन्होंने कहा हमारे पास रेस्क्यू के लिए 8 लोगों की टीम है। लेकिन पहुंचने में हमें वहां तक समय लगेगा,शहडोल से उसकी दूरी काफी है और हमारा मुख्यालय शहडोल है।



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